Wednesday, May 10, 2017

कोई खबर नहीं उनकी



कोई खबर नहीं उनकी 
वो गए है 
जब से सरहदों पे 

मेहंदी भी 
अभी तो हाथों से 
छूटी ना थी 
और बुला ले गयी 
बैरन ड्यूटी साजन को 

ओह रे देसवा 
मन भी नहीं 
तुझे क्या कहु 
तेरे ही खातिर तो 
जी रही हूँ मै 
यहाँ 
और खट रहे है 
पिया
वहा 

सरहदों पे 
बजती है 
दिन रात 
दिलों की है 
वो धड़कने....सुनो तो जरा 
हुजूर 
साहेबान  

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