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Wednesday, April 19, 2017

आखिर जन्भूमि विवाद का हल क्या है ? - मोदी जी को खुला खत





पहली बात कि यह एक समस्या नहीं है "जन्भूमि विवाद" इसके एक पक्ष द्वारा समस्या को दिया गया नामकरण है | इसका दूसरा नाम "बाबरी ढांचा /मस्जिद विवाद" और तीसरा "अयोध्या विवाद" ऐसे कई नाम है | जिनकी फेहरिश्त में नए रिश्तेदार जैसे "हिन्दू मुस्लिम दंगे " , "मुंबई बम धमाके " , "गोधरा" आदि जुड़ते गए है | आज यह एक समस्याओं का खानदान है जिनका विधिवत नामकरण और पहचान दर्ज है | इस परिवार को ना मारा जा सकता है , ना रोका जा सकता है ना ही निर्वासित किया जा सकता है | 

तो इसे सुलझाने के सिवाय कोई चारा बचता ही नहीं | क्योंकि इस विवाद ने कई दंगो और नरसंहारों को जन्म दिया है और आज देश में अमन शांति की राह में बड़ा रोड़ा बन अदालत का कीमती समय भी नष्ट करने पर आमादा है | 

अब प्रश्न है कि यदि इसे सुलझाना ईतना /अविलम्ब आवश्यक है तो "कैसे" और "कौन" ईसे "कहाँ" सुलझाए ?

अदालतों के दृष्टिकोण से यह दो पक्षों का भूमि सम्बन्धी विवाद है जिसमे कालांतर में "अपराध" , "साजिश" और "हत्या/आत्महत्या" जैसे संगीन पक्ष समाविष्ट हो गए है | क्या "क्रिमिनल" दावों के निबटारे के बिना भूमि विवाद पर सीधा फैसला देना उचित होगा ? 
हां |
क्योंकि अब यह सीधा सीधा देश की अखण्डता और सम्प्रभुता को चुनौती दे  रहा है | तो  फिर क्यों ना देश की चुनी हुई सरकार इसे दो पक्षों का मुद्दा ना मानकर देशहित का मुद्दा मान संसद में ईसका हल निकाले ?
क्यों ना न्यायपालिका के विलम्ब और भय / सीमाओं को समझते हुवे उससे यह मुद्दा लेकर संसद तय करे कि क्या उचित है ?



अब प्रश्न उठता है संसद के फैसले पर सर्व स्वीकार्यता का | लगभग सभी पक्ष अब और अधिक तनाव नहीं चाहते और कुछ कुछ नरम स्वर में झुकने को भी राजी है | ऐसे में जरुरत है लोगो को एकदूसरे के मजहबों का सम्मान करना सिखाने की और अगली पीढ़ी इसके लिए सही विकल्प है | शिक्षानीति में धार्मिक और भाषायी सहिष्णुता को अनिवार्य बनाया जाए | 

पहले ही भाषा और मजहबों के नाम पर टूटा पड़ा देश एक "सार्वभौम नागरिक संहिता" और "वैश्विक मानक मानवीय मूल्यों" को संविधान में देखना चाहता है | 

इस पहल में यह तो तय है कि सभी को बहुत कुछ मिलेगा मगर इसके लिए अपने अहम् और स्वार्थों की बलि देनी होगी | यह काम सिर्फ सत्ता के कठोर रुख से संभव है | 
इसके लिए वर्तमान  से बेहतर ना तो कोई समय है ना ही उत्तम अवसर | 

मोदी जी विवाद का लोहा गर्म है और बहुमत का हथौड़ा सख्त , मारिये और ईतिहास में अमर हो जाइये | जनता आपके साथ है , संदेह को सर्वथा छोड़ दीजिये !
जय हिन्द !