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Thursday, June 1, 2017

तनाव के वे क्षण





तनाव के वे क्षण 
लेजाते है 
नजदीक 
ईश्वर के 
प्रकृति के 
स्वयं के 
ये सामीप्य 
प्रथमत:
भयावह लगता है 
किन्तु 
समझ सको तो 
आत्मा पर 
ईश्वरीय कृपा से 
पूर्व का 
झंझावात भर है 
ताकि तुम जान पाओ 
कि ये "तुम" हो 
और 
ये तुम्हारा "डर " है 
बेचैनी 
कुछ पा जाने 
या खो देने की 
अर्पण कर दी 
मैंने तो 
प्रभु चरणों में 
अपने कर्म पर ही 
लक्ष्य करूंगा 
जीऊंगा या मरूंगा 
मै नहीं 
वो तय करेगा 
वही तो करता ही है ना !

मित्रों ये पंक्तियाँ तब लिख रहा हूँ जब मै ईतना बेचैन और बेसब्र हुवा बैठा था कि अगर सब ठीक ना हुवा तो कुछ कर ही लूंगा | मैंने अपनी माँ और एक बचपन के मित्र से अपनी भावनाये बांटी और नेट पर प्रोत्साहित करने वाले कई वीडियो देखे , सुने , पढ़े .... मित्रों अपने आप को , प्रकृति और सबसे बढ़ कर उस नियंता को अवसर दीजिये , अवसर ना दे सके तो बस पुकार कीजिये , यकीं मानिये वो सिर्फ सूनता ही नहीं बल्कि बहुत कुछ ऐसा करता है जो आप सोच भी नहीं सकते थे | तो अपनी ताकत को व्यर्थ की सोच से हटाकर एक बार केवल शुद्ध मन से प्रार्थना में लगाइये , यही सन्देश है। ..... सब और सदा ही मंगल हो !
जय हो प्रभु !
आप हो प्रभु ! केवल आप ही हो !!