तप , त्याग , क्षमा की मूर्ति
लक्ष्मी ,काली ,कल्याणी !
सब जग रची महू आप विराजी ,
तू ही रमा ,शारदा ,वेदवाणी !
ब्रह्मा रची फिर वेद रचे चारि ,
रची
सृष्टि त्रिदेव शरण मानी !
शिव चौको कियो सती सु नारी ,
तू ही जगजननी , उमा , भवानी !
संशय दुःख ताप हरति जग का
आप हवन हो शुभ देती महादानी !
तुम्हरे चरण भेंट करू अल्पज्ञ मति
माँ ! तुम अथाह ज्ञानराशि मै अज्ञानी ||
जय जय माँ महागौरी ! माँ जगदम्बा !!