Tuesday, April 20, 2010

आक्रोश

निष्कर्ष पर
पहुँचने की जल्दी,
जड़ है ,
कलियुगी
अव्यवस्थाओं की
त्वरित
प्रतिक्रियाएँ ,
अनियंत्रित,
अनाधिकृत,
अपरिपक्व ,
अपरिष्कृत ,
आक्रोश
रोग बन चुका है |
ये महानगर
ऐसे
रोगियों को
बेहतर इलाज
का
आश्वाशन देते है |
यहाँ
आप
अपनी
जिंदगी बेचकर
दवा खरीद सकते है ,
दुवा भी ,
दवाएं
महँगी है बहुत ,
कारगर कितनी है |
कोई नहीं बताता
यहाँ |

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